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खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC), क्या है इसका उद्देश्य? और आम जनता को इस से क्या होगा फायदा

खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC): भारत सरकार द्वारा गठित खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) जिसका कार्य देशभर के दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में खादी और अन्य ग्राम उद्योगों के विकास के लिए कार्यक्रमों की योजना बनाना, आयोजन, बढ़ावा देना और उन्हें लागू करना है। इससे विपणन योग्य वस्तुओं के निर्माण को बढ़ावा मिल सकेगा और समग्र गरीब वर्ग को सशक्त बनाने में मदद मिलेगी। खादी और ग्रामोद्योग आयोग द्वारा कच्चे माल जैसे की सेमी-फिनिश्ड वस्तुओं के लिए कॉमन सर्विस फैसिलिटी के निर्माण पर भी ध्यान दिया जाएगा, जिससे पिछले कई वर्षों में आयोग ने बहुत सी नौकरियों को उत्पन्न करने में भी मदद की है। तो चलिए जानते हैं खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) का कार्य, उद्देश्य, योजना की विशेषताएं और इसके अंतर्गत आने वाली बहुत सी योजनाओं से संबंधित पूरी जानकारी।

Khadi and Village Industries Commission Scheme खादी और ग्रामोद्योग आयोग
Khadi and Village Industries Commission Scheme

केवीआईसी का मुख्य उद्देश्य

भारत सरकार द्वारा एक गैर संविधानिक निकाय के रूप में खादी और ग्रामोद्योग आयोग को गठित करने का मुख्य उद्देश्य देश के पारंपरिक उद्योगों और कारीगरों के क्लस्टर विकास करना है, साथ ही इसके कुछ मुख्य उद्देश्य इस प्रकार है।

  • देश में रोजगार को बढ़ावा देना
  • खादी की वस्तुओं के प्रचार और बिक्री को बढ़ावा देना
  • समाज के गरीब और वंचित वर्गों को सशक्त बनाकर उन्हें आत्मनिर्भरता की और बढ़ावा देना है।

खादी और ग्रामोद्योग आयोग की विशेषताएं

  • केवीआईसी के अंतर्गत ब्याज दर आवेदक की प्रोफाइल और बिजनेस संबंधी जरूरतों पर निर्भर करता है।
  • पीएमईजीपी द्वारा लोन डायरेक्ट और गवर्न किए जाते हैं, जिसमे मैन्युफैक्टरिंग सेक्टर के लिए लोन राशि अधिकतम लोन 50 लाख रूपये और बिजनेस और सर्विस सेक्टर के लिए लोन राशि अधिकतम 20 लाख रूपये तक है।
  • लोन के लिए अधिकतम आयु सीमा नहीं है।
  • फंडिंग पैटर्न पीएईजीपी योजना वाल सेक्शन में बताया गया है।
  • अलग अकाउंट में तीन साल के लिए लॉक-इन जिसे बाद में केवीआईसी लोन के साथ एडजस्ट किया जाता है
  • योजना के अंतर्गत लोन भुगतान अवधि की बात करें तीन साल से साल है, जिसमे 6 महीने का मोरेटोरियम पीरियड शामिल है।

कार्य

केवीआईसी के निम्नलिखित कार्य कुछ इस प्रकार है।

  • यह खादी के विकास के लिए कार्यक्रमों की योजना, प्रचार, आयोजन और बढ़ावा देने का कार्य करता है।
  • उत्पादों की आपूर्ति के लिए कच्चे माल का भण्डार बनाना है।
  • खादी एवं ग्राम उद्योग उत्पादों साथ ही हस्तशिल्प की बिक्री और मार्केटिंग को बढ़ावा देना।
  • कच्चे माल, जिसमे सेमी-फिनिश्ड (जो पूरा बनकर तैयार नहीं हुआ है) प्रोडक्ट है इसकी प्रोसेसिंग के लिए कॉमन फैसिलिटी का गठन करना।

योग्यता शर्तें

केवीआईसी योजना के अंतर्गत लोन प्राप्त करने के आपको कुछ निर्धारित पात्रताओं को पूरा करना होगा, यह लोन निम्नलिखित संस्थाओं को प्राप्त किया जा सकता है, जिनकी जानकारी कुछ इस प्रकार है।

  • योजना का लाभ लेने के लिए स्वयं सहायता समूह आवेदन कर सकते हैं।
  • 8 वीं कक्षा पास के सर्टिफिकेट के साथ न्यूनतम 18 वर्ष की आयु के व्यक्ति आवेदन कर सकते हैं।
  • चैरीटेबल ट्रस्ट और कई अन्य संस्थाएं।
  • रजिस्टर्ड और को-ऑपरेटिव सोसाइटी।

ब्याज दर सब्सिडी कार्यक्रम

केवीआईसी द्वारा दिया गया ब्याज सब्सिडी कार्यक्रम बैंकिंग संस्थानों द्वारा पढ़िए गए विशेष लोन पर लागू होगा, इसमें निम्न द्वारा लोन की पेशकश की जाती है।

  • 1912 के सहकारी समिति अधिनियम ने सहकारी समिति की स्थापना की।
  • सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम 1860 के तहत पंजीकरण सोसिटी
  • वित्त संस्थान: सहकारी बैंक, राष्ट्रीयकृत बैंक, राज्य वित्तीय निगम और औद्योगिक विकास बैंक सभी अनुसूचित और गैर-अनुसूचित बैंक है।
  • ट्रस्ट जो जनता के अच्छे और धार्मिक उद्देश्यों के लिए स्थापित किए गए हैं।

KVIC योजना के तहत बैंकों से लोन कैसे करें प्राप्त

खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) के अंतर्गत बहुत से योजनाएं हैं, जिनके जरिए निजी एवं सार्वजनिक क्षेत्रों के बैंकों द्वारा योग्य उधारकर्ताओं को व्यापार या वर्किंग कैपिटल लोन ऑफर किया जाता है, आपको बता दें योजना के अंतर्गत आने वाली बहुत सी योजनाएं जैसे प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP), खादी कारीगरों के लिए वर्कशेड योजना, पारंपरिक उद्योगों के उत्थान के लिए फंड स्कीम (SFURTI), मधुमखी पालन- द हनी मिशन शामिल हैं।

KVIC लोन योजनाएं

केवीआईसी के अंतर्गत के अंतर्गत नागरिकों के लिए कई लाभकारी योजनाएं संचालित की जाती है, जिनकी जानकारी कुछ इस प्रकार है।

प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP)

प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2008 में शुरू की गई एक क्रेडिट लिंक सब्सिडी योजना है, जिसे प्रधानमंत्री रोजगार योजना और ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम को मिलकर बनाया गया है। इस योजना के माध्यम से सरकार का मुख्य उद्देश्य देशभर के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में नौकरी के अवसर उत्पन्न करना है साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों से शहरी क्षेत्रों में हो रहे पलायन को बेरोजगार युवाओं और कलाकारों के लिए स्थाई रोजगार का प्रबंधन करना है, जिससे देश में बेरोजगारी की दरों को कम करने में मदद मिल सकेगी।

PMEGP के अंतर्गत मैन्युफक्चरिंग सेक्टर के तहत मंजूरी मिले प्रोजेक्ट/यूनिट की अधिक लागत 25 लाख रूपये वहीं बिजनेस/सर्विस सेक्टर की अधिकतम लागत 10 लाख रूपये और कुल प्रोजेक्ट कॉस्ट की शेष राशि बैंकों द्वारा टर्म लोन के रूप में प्रदान की जाएगी।

खादी कारीगरों के लिए वर्कशेड योजना

देश के गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले बीपीएल खादी कारीगरों को वर्कशेड बनाने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने हेतु खादी कारीगरों के लिए वर्कशेड योजना को शुरू किया गया है। योजना का मुख्य उद्देश्य सूत कातने वालों और बुनकरों के लिए एक बेहतर कार्यस्थल प्रदान कर काम करने के लिए अधिक जगह प्रदान करना है और सिल्वर्स, कच्चे माल और औजार आदि के लिए भंडार प्रदान करने के साथ-साथ प्रकाश व्यवस्था के लिए बिजली कनेक्शन के माध्यम से सूत कातने वालों की दक्षता और उत्पादकता में सुधार करना है।

पारंपरिक उद्योगों के उत्थान के लिए फंड स्कीम (SFURTI)

SFURTI योजना की शुरुआत वर्ष 2005 में पारंपरिक उद्योगों के उत्थान के लिए शुरू की गई एक लाभकारी योजना है, जिसका उद्देश्य पारंपरिक कारीगरों और उद्योगों को समूहों में संगठित करना है, जिससे वह एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा कर सकेंगे। इसके लिए योजना के तहत उत्पादन उपकरण प्रतिस्थापन, उत्पादन विकास, गुणवत्ता सुधार, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के लिए आवश्यकता आधारित सहयोग प्रदान करना है। योजना के लिए केंद्र और राज्य सरकरों और अर्ध-सरकारी संस्थानों, गैर-सरकारी संगठनों जैसे संस्थानों में आवेदन किया जा सकता है।

खादी सुधार और विकास कार्यक्रम

खादी सुधार और विकास कार्यक्रम जिसे एशियाई विकास बैंक की सहायता से कार्यान्वित किया जाता है, इसमें खादी क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए सार्वजनिक निजी भागीदारी के तहत एक विपणन संगठन की स्थापना शामिल है। खादी सुधार और विकास कार्यक्रम का गठन नौकरियाँ उत्पन्न करने, कारीगरों की आय को बढ़ावा देने और खादी उद्योगों की वर्तमान जरूरतों को देखते हुए खादी के पद को सुनिश्चित करने के लिए किया गया है, जिससे खादी प्रोडक्ट्स को मार्किट में अपनी जगह सुनिश्चित करने और उसे बाजार की जरूरतों के मुताबिक़ तैयार करने के साथ-साथ सुब्सिड़ी और बढ़ा हुआ वेतन प्रदान करना है।

मधुमखी पालन- द हनी मिशन

केवीआईसी ने मधुमखी पालन में सहयोग देने और मधुमखी पालन वाले राज्यों में नागरिकों के लिए रोजगार विक्सित करने के उद्देश्य से मधुमखी पालन-द हनी मिशन की शुरुआत की है। इस मिशन के जरिए ग्रामीणक्षेत्रों में रह रहे नागरिकों की आजीविका में विकास करने का कार्य किया जाएगा, योजना के तहत शहद की मेडिसिनल और फ़ूड वैल्यू को बढ़ाने, खेती से सबंधित गतिविधियों को सहायता देने, वाणी के संरक्षण के प्रयासों में योगदान देने अदि कार्य किया जाता है।

मार्किट डेवलपमेंट असिस्टेंट (MDA)

इस योजना के जरिए खादी के विकास में मदद मिलती है, यह एक एमएसएमई अंतराष्ट्रीय सहयोग योजना है। इस योजना के अंतर्गत खादी का विकास होता है, जिसमे उत्पादन पर 20% का भुगतान किया जाता है। एमडीए का लगभग 25% संसथान को भुगतान किया जाता है, जिसमे से 25% कारीगरों को इंसेंटिव के रूप में और संस्थानों को 30%उत्पादन के लिए और 45% मार्केटिंग उद्देश्यों के लिए दिया जाता है। इस योजना के तहत पोस्ट/बैंक ऑफिस अकाउंट के जरिए अतिरिक्त प्रोत्साहन के रूप में बुनकरों और स्पिनरों के बीच भुगतान के लिए 25% की फाइनेंसियल असिस्टेंट रिजर्व होती है।

इंटरेस्ट सब्सिडी एलिजिबिलिटी सर्टिफिकेट

ISEC (इंटरेस्ट सब्सिडी एलिजिबिलिटी सर्टिफिकेट) योजना की शुरुआत देश में खादी उत्पादों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई है। योजना के तहत देश में खादी उद्योगों की कार्यशील पूंजी के लिए 4 फीसदी प्रतिवर्ष की छूट दर पर लोन, संस्थानों की जरूरतों के अनुसार उपलब्ध करवाया जाता है। यह योजना केवीआईसी के सभी रजिस्टर्ड संस्थानों के लिए लागू है।

केवीआईसी का अंतर्गत कौन-कौन सी योजनाएं शामिल हैं?

केवीआईसी का अंतर्गत प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP), खादी कारीगरों के लिए वर्कशेड योजना, पारंपरिक उद्योगों के उत्थान के लिए फंड स्कीम (SFURTI), मधुमखी पालन- द हनी मिशन योजनाएं शामिल हैं।

क्या उधारकर्ता के लिए बैंक/लोन संस्थानों में सेक्योरिटी जमा करनी जरुरी है?

नहीं उधारकर्ता के लिए बैंक/लोन संस्थानों में सेक्योरिटी जमा करनी जरुरी नहीं है।

केवीआईसी के अंतर्गत कौन-कौन लाभ ले सकेंगे?

स्वयं सहायता समूह, चैरिटेबल और अन्य संस्थाएं, रजिस्टर्ड और को-ऑपरेटिव सोसाइटी, 8 वीं कक्षा का सर्टिफिकेट प्राप्त न्यूनतम 18 वर्ष का व्यक्ति।

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