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अब नहीं दिखेगा 5 रुपये का ये सिक्का, ऐसी भी क्या मज़बूरी थी आरबीआई के साथ जो इसे बंद करना पड़ा?

भारत में करेंसी के रूप में नोट और सिक्के चलते हैं। आपने देखा होगा कि पांच रुपये का सिक्का कई तरह का होता है। एक पुराने वाला मोटा सिक्का होता है और दूसरा एक इसके बाद आया सुनहरे रंग का पतला सिक्का। शायद आपने ध्यान दिया हो तो, पिछले कुछ समय में इस बात पर जरूर गौर किया होगा कि 5 रुपये के पुराने मोटे सिक्के बाजार में आने बंद हो गए हैं। अब आपको ये सिक्के प्रायः नहीं दिखते हैं।

अब बाजार में जो सिक्के बचे हैं, वही चल रहे हैं। 5 रुपये का मोटा वाला सिक्‍का आखिर कहां चला गया। जवाब है कि RBI ने बंद किया 5 रुपये का पुराना मोटा सिक्का। इसके पीछे का कारण भी काफी रोचक है। इसके पीछे एक बहुत बड़ी वजह थी, आइये इस आर्टिकल के माध्यम से जानते कि आरबीआई को आखिर किस मजबूरी में लेना पड़ा ऐसा फैसला।

अब नहीं दिखेगा 5 रुपये का ये सिक्का, ऐसी भी क्या मज़बूरी थी आरबीआई के साथ जो इसे बंद करना पड़ा?

भारत में सिक्के ढालने का एकमात्र अधिकार भारत सरकार के पास है। सिक्का ढलाई का काम भारत प्रतिभूति मुद्रण तथा मुद्रा निर्माण निगम लिमिटेड (SPMCIL) के स्वामित्व वाली 4 टकसालों द्वारा किया जाता है। यह टकसालें मुंबई, हैदराबाद, कोलकाता तथा नॉएडा में स्थित हैं। भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम की धारा 38 के अनुसार संचलन हेतु सिक्के सिर्फ RBI के माध्यम से जारी किये जा सकते हैं।

5 के पुराने सिक्कों की हो रही थी गैर-कानूनी तस्करी

5 रुपये के पुराने सिक्के काफी मोटे होते थे और इनको बनाने में ज्यादा मेटल लगती थी। ये सिक्के जिस धातु से बनते थे, उसी मेटल से दाढ़ी बनाने वाली धारदार ब्लेड भी बनाई जाती है। इस वजह से लोगों ने इसका गलत फायदा उठाना शुरू कर दिया और 5 रुपये के पहले वाले मोटे सिक्कों की गैर-कानूनी तस्‍करी बढ़ गई थी, अपराधी 5 रुपये के इस सिक्‍के से 12 रुपये का सामान बनाकर बेच रहे थे। जिस पर रोक लगाने के लिए ही RBI द्वारा यह कदम उठाया गया।

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सिक्कों से बनाते थे ब्लेड

दरअसल ज्यादा मेटल होने की वजह से 5 रुपये के इन सिक्कों की अवैध तस्करी करके इन्हें गैर कानूनी तरीके से बांग्लादेश भेजा जाने लगा। जहाँ इन सिक्कों को पिघलाकर इनकी मेटल से ब्लेड बनाया जाने लगा। दरअसल 5 रुपये के पुराने सिक्के काफी वजन होते हैं, लिहाजा इन सिक्कों को बनाने में भी ज्यादा मेटल लगता है। ये सिक्के जिस मेटल से बने हुए थे, दाढ़ी बनाने वाला ब्लेड भी उसी मेटल से बनाया जाता है।

एक सिक्के से बन जाते हैं कई ब्लेड

शायद आपको विश्वास नहीं होगा कि इस एक सिक्के से 6 ब्लेड बन जाती थी और एक ब्लेड 2 रुपये में बिकती थी। इस तरह एक 5 रुपये के सिक्के को पिघलाकर उससे ब्लेड बनाकर 12 रुपये में बेचा जा सकता है, इस तरह वहां के लोगों को काफी फायदा होता था। इसी वजह से इन सिक्कों को बांग्लादेश में गलत तरीकों से स्मगलिंग किया जाने लगा।

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सरफेस वैल्यू से ज्यादा थी इसकी मेटल वैल्यू

किसी भी सिक्के की दो तरह की कीमत से होती है पहला होता है ​उसकी सरफेस वैल्यू और दूसरा उसकी मेटल वैल्यू। सरफेस वैल्यू उसे कहते हैं जो सिक्के पर लिखी होती है, जैसे 5 के सिक्के पर 5 रूपया लिखा होता है। जबकि उसको बनाने के लिए इस्तेमाल हुई मेटल की कीमत उस सिक्के की मेटल वैल्यू होती है। पांच रुपये के पुराने मोठे सिक्के को पिघलाने पर उसकी मैटेलिक वैल्‍यू, सरफेस वैल्यू से ज्यादा हो जाती है। जिसका फायदा उठा कर उससे ब्लेड्स बनाए जाने लगे।

सूचना मिलने पर RBI ने लिया फैसला

जब बाजार से ये मोटे सिक्के अचानक कम होने लगे और धीरे धीरे गायब होने लगे तो सरकार को इस पूरी गड़बड़ी की पता चला। इस मजबूरी में RBI को ये फैसला लेना पड़ा और 5 रुपये का वो सिक्का बंद कर दिया तथा सिक्कों को पहले के मुकाबले पतला कर दिया। इसके अलावा इन सिक्के को बनाने में इस्तेमाल किये जाने वाली मेटल को भी बदल दिया ताकि इन सिक्कों की गैर-कानूनी तस्करी करने वाले इनसे ब्लेड ना बना सके।

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